हाल ही में हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य के खुलने के बावजूद, भारत और पूर्वी एशिया के रिफाइनरियां मध्य पूर्व से कच्चे तेल की खरीद में तत्काल वृद्धि करने में हिचकिचा रहे हैं। भू-राजनीतिक तनावों के कारण पहले आपूर्ति बाधित होने की आशंका थी, लेकिन अब स्थिति सामान्य होने के बावजूद, रिफाइनरियां सावधानी बरत रही हैं। विशेषज्ञ बताते हैं कि रिफाइनरियां वैकल्पिक स्रोतों से तेल प्राप्त करने के विकल्पों पर विचार कर रही हैं और बाजार की अस्थिरता को देखते हुए तुरंत खरीदारी करने में जोखिम नहीं लेना चाहती हैं। इसके अतिरिक्त, वैश्विक आर्थिक मंदी की आशंकाओं के कारण तेल की मांग में कमी का भी अनुमान है, जिससे रिफाइनरियां सतर्क रुख अपना रही हैं। फिलहाल, वे मौजूदा तेल भंडार का उपयोग करने और बाजार की स्थिति का आकलन करने पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं। यह स्थिति तेल की कीमतों पर प्रभाव डाल सकती है, क्योंकि मांग में कमी से कीमतों में गिरावट आ सकती है।