जापान के बाहर होने के साथ ही, एशियाई टीमों का फीफा विश्व कप से सफर समाप्त हो गया है। ऑस्ट्रेलिया एकमात्र ऐसी टीम है जो एशियाई फुटबॉल परिसंघ (एएफसी) से है, लेकिन यह भौगोलिक रूप से एशिया का हिस्सा नहीं है। इस बार एशिया ने नौ टीमों को भेजा था, जो कि अब तक की सबसे बड़ी संख्या थी, लेकिन अब केवल ऑस्ट्रेलिया ही बची है। एशियाई टीमों का प्रदर्शन निराशाजनक रहा है, जिसमें कई टीमों ने एक भी मैच नहीं जीता। इराक ने 12 गोल खाए और केवल एक गोल किया, जबकि उज़्बेकिस्तान ने 11 गोल खाए और दो गोल किए। कतर, जो दो बार की एशियाई चैंपियन है, केवल एक अंक ही हासिल कर पाई। कुल मिलाकर, सात एशियाई टीमों ने केवल एक मैच जीता, छह ड्रॉ किए और चौदह हारे। इस प्रदर्शन से एशिया की प्रगति पर सवाल उठ रहे हैं, और यह स्पष्ट है कि महाद्वीप को अभी भी लंबा रास्ता तय करना है। शुरुआती दौर में कुछ उम्मीदें जगी थीं, लेकिन बाद में एशियाई टीमों को बड़ी टीमों से हार का सामना करना पड़ा।
