एस एंड पी ग्लोबल रेटिंग्स के अनुसार, एशिया-प्रशांत क्षेत्र की एयरलाइंस, जिनमें भारत भी शामिल है, जेट ईंधन की कीमतों में कमी के बावजूद हवाई किराए को ऊंचा बनाए रख सकती हैं। मजबूत यात्री मांग के कारण एयरलाइंस को किराए कम करने का दबाव नहीं होगा। ईंधन की कीमतों में गिरावट से एयरलाइंस की लागत तो कम होगी, लेकिन वे इस लाभ को किराए में कमी के रूप में ग्राहकों तक नहीं पहुंचा सकती हैं। यात्री मांग में लचीलापन एयरलाइंस को अपनी लाभप्रदता बनाए रखने में मदद करेगा। हाल के महीनों में ईंधन की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखा गया है, लेकिन मांग मजबूत बनी हुई है। उद्योग विश्लेषकों का अनुमान है कि यह प्रवृत्ति निकट भविष्य में जारी रहेगी, जिससे हवाई यात्रा की लागत उपभोक्ताओं के लिए अधिक बनी रहेगी।