आशूरा व्रत इस्लामी कैलेंडर के मुहर्रम महीने की 10वीं तारीख को किया जाने वाला एक महत्वपूर्ण सुन्नत व्रत है। यह व्रत पैगंबर मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) द्वारा पसंद किया गया एक पुण्य कार्य माना जाता है। आशूरा व्रत का पालन करने से कई धार्मिक लाभ प्राप्त होते हैं, जिसमें पिछले वर्ष के पापों का प्रायश्चित शामिल है। इस व्रत के लिए एक विशिष्ट नियत (इरादा) निर्धारित है जिसका पाठ किया जाता है। इस्लामी विद्वानों ने इस व्रत के महत्व और धार्मिक आधारों को कुरान और हदीस से स्पष्ट किया है। आशूरा व्रत मुसलमानों के लिए अल्लाह की निकटता प्राप्त करने और अपनी आस्था को मजबूत करने का एक अवसर है। यह व्रत स्वैच्छिक है, लेकिन इसका पालन करने से अल्लाह की कृपा प्राप्त होती है।