इतिहास में तत्काल संतुष्टि की चाहत ने अक्सर आध्यात्मिक हेरफेर को जन्म दिया है। सम्राट अशोक ने उन लोगों का विरोध किया जो व्यक्तियों के डर और उम्मीदों का फायदा उठाते थे। उन्होंने आस्था के लेन-देन वाले स्वरूप पर प्रकाश डाला और इसके विरुद्ध खड़े हुए। वर्तमान समय में यह चक्र 'प्रोस्पेरिटी गॉस्पेल' और वेलनेस आंदोलनों के रूप में पुनः दिखाई देता है। यह दर्शाता है कि आध्यात्मिक शोषण का यह सिलसिला आज भी जारी है। इस पुनरावृत्ति वाले चक्र से बचने के लिए हमें जागरूक होने की आवश्यकता है। हमें यह समझना होगा कि वास्तविक आध्यात्मिक विकास साधारण लेन-देन से परे होता है।

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