एक जांच में पता चला है कि केंद्रीय प्रशासन 339,000 मुकदमों का सामना कर रहा है। यदि विकेंद्रीकृत निकायों, जैसे कि Anses को भी शामिल किया जाए, तो मुकदमों की संख्या और भी बढ़ जाती है। इन मुकदमों के कारण अनिश्चितता की स्थिति है क्योंकि अधिकांश मामलों में अभी तक कोई निश्चित राशि निर्धारित नहीं की गई है। सरकार को कितना भुगतान करना होगा, यह अभी तक स्पष्ट नहीं है। यह सार्वजनिक प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती है। इन मुकदमों में विभिन्न प्रकार के मामले शामिल हैं, जिनकी विस्तृत जानकारी अभी सामने नहीं आई है। इस स्थिति के कारण सरकारी खजाने पर दबाव बढ़ सकता है।