आर्कटिक क्षेत्र में समुद्री बर्फ की मात्रा में तेजी से कमी आई है। हाल ही में किए गए एक अध्ययन से पता चला है कि 2024 और 2025 के सर्दियों के चरम स्तरों के बीच बर्फ में 5.8% की गिरावट दर्ज की गई है। दो साल पहले देखी गई बर्फ पिघलने की गति में कमी को अब एक अस्थायी राहत माना जा रहा है। यह अध्ययन इस बात की पुष्टि करता है कि जलवायु परिवर्तन के कारण आर्कटिक बर्फ पिघलने की प्रक्रिया फिर से तेज हो गई है। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह स्थिति वैश्विक जलवायु पर गंभीर प्रभाव डाल सकती है। इससे समुद्री जल स्तर में वृद्धि और मौसम के पैटर्न में बदलाव का खतरा बढ़ सकता है। इस अध्ययन से तत्काल जलवायु कार्रवाई की आवश्यकता और बढ़ गई है।