इज़राइल में होने वाले चुनाव के बाद, अरब राष्ट्रों का मानना है कि नेतन्याहू के जाने के बाद भी इज़राइल की सुरक्षा नीति और दो-राष्ट्र समाधान के विरोध में कोई बदलाव नहीं आएगा। हालांकि, वे यह भी महसूस कर रहे हैं कि फ़िलिस्तीनियों और क्षेत्रीय मामलों में दृष्टिकोण में बदलाव से संबंधों की प्रकृति बदल सकती है। पर्यवेक्षकों के अनुसार, भले ही नई सरकार सुरक्षा सिद्धांत और दो-राष्ट्र समाधान के विरोध को बरकरार रखती है, फिर भी फ़िलिस्तीनियों के प्रति और क्षेत्रीय कूटनीति में दृष्टिकोण में बदलाव से संबंधों में सुधार की गुंजाइश है। अरब देशों को उम्मीद है कि चुनाव के परिणाम चाहे जो भी हों, इज़राइल के साथ उनके संबंध पूरी तरह से कटने की स्थिति में नहीं पहुँचेंगे। वे मानते हैं कि बातचीत जारी रखने और क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने की संभावना बनी रहेगी। यह भी माना जा रहा है कि नई सरकार अधिक व्यावहारिक दृष्टिकोण अपना सकती है, जिससे संबंधों में सुधार हो सकता है। इज़राइल और अरब देशों के बीच संबंधों का भविष्य अनिश्चित है, लेकिन उम्मीद है कि कूटनीति के माध्यम से सकारात्मक बदलाव लाए जा सकते हैं।