संवैधानिक परिषद की सिफारिशों में तेजी लाने के लिए कानूनी बदलाव किए गए थे, लेकिन इसके बावजूद नियुक्तियों में देरी जारी है। कई महत्वपूर्ण निगरानी निकायों में लंबे समय से पद खाली पड़े हैं। इन रिक्तियों के कारण इन संस्थाओं की कार्यक्षमता और निगरानी क्षमता पर असर पड़ रहा है। कानूनी सुधारों का उद्देश्य चयन प्रक्रिया को सरल और त्वरित बनाना था। हालांकि, जमीनी स्तर पर नियुक्तियां अभी भी रुकी हुई हैं। यह स्थिति शासन और संवैधानिक जवाबदेही के लिए एक चुनौती बनी हुई है। वर्तमान में ये निकाय सीमित संसाधनों और कर्मचारियों के साथ काम कर रहे हैं।
