१९८६ में, शीत युद्ध अपने चरम पर था, और स्टीव जॉब्स एप्पल से निकाले जाने के बाद अपना करियर फिर से बनाने का प्रयास कर रहे थे। उन्होंने एक साल पहले NeXT की स्थापना की थी और एक ऐसा कंप्यूटर बनाने की कल्पना की थी जो विश्वविद्यालयों, शोधकर्ताओं और वैज्ञानिकों के काम करने के तरीके को बदल दे। लेकिन, यह कंपनी आर्थिक रूप से संघर्ष कर रही थी और उसे धन की सख्त जरूरत थी। इसी समय, सीआईए (CIA) ने NeXT की तकनीक में गहरी दिलचस्पी दिखाई, विशेष रूप से इसकी उन्नत क्रिप्टोग्राफी क्षमताओं में। सीआईए ने गुप्त रूप से NeXT में निवेश किया, जिससे कंपनी को आर्थिक रूप से मदद मिली और जॉब्स को अपना काम जारी रखने का अवसर मिला। यह निवेश एप्पल और सीआईए के बीच एक छिपे हुए रिश्ते की शुरुआत थी, जिसके बारे में पहले कभी सार्वजनिक रूप से खुलासा नहीं किया गया था। इस साझेदारी से NeXT की तकनीक का उपयोग अमेरिकी खुफिया सेवाओं द्वारा किया जा सका।