कनाडा के युकोन क्षेत्र में जमी हुई गिलहरी के मल से प्राप्त डीएनए के विश्लेषण से वैज्ञानिकों ने 7 लाख वर्ष पुराने विशालकाय मैमथ, घोड़े और स्टेपी बाइसन के जीनोम को पुनर्निर्मित किया है। यह खोज आर्कटिक घास के मैदानों में रहने वाले इन विलुप्त प्रजातियों के बारे में नई जानकारी प्रदान करती है। गिलहरी के मल में संरक्षित डीएनए की गुणवत्ता आश्चर्यजनक रूप से अच्छी पाई गई, जिससे प्राचीन डीएनए प्राप्त करना संभव हो सका। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह विधि विलुप्त जानवरों के आनुवंशिक इतिहास को समझने के लिए एक नया मार्ग खोल सकती है। इस अध्ययन से पता चलता है कि गिलहरी के मल में विभिन्न जानवरों के डीएनए के अंश पाए जाते हैं, क्योंकि गिलहरी विभिन्न प्रकार के पौधों और जानवरों का भोजन करती है। यह खोज आर्कटिक पारिस्थितिकी तंत्र और जलवायु परिवर्तन के प्रति उसकी संवेदनशीलता को समझने में भी मदद कर सकती है। भविष्य में, इस तकनीक का उपयोग अन्य क्षेत्रों में भी प्राचीन डीएनए की खोज के लिए किया जा सकता है।