एक अंतर्राष्ट्रीय अध्ययन में पता चला है कि प्रदूषण आज का नहीं, बल्कि प्रागैतिहासिक काल से ही जारी है। ग्रीनलैंड की बर्फ में 1,000 मीटर की गहराई से प्राप्त नमूनों से यह खुलासा हुआ है। वैज्ञानिकों ने पाया कि मानव गतिविधियाँ हजारों वर्षों से पारा प्रदूषण फैला रही हैं। यह निष्कर्ष दर्शाता है कि कांस्य युग में भी मानव गतिविधियों का पर्यावरण पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा था। अध्ययन के अनुसार, प्राचीन धातु निष्कर्षण और दहन प्रक्रियाओं के कारण वातावरण में पारा का स्तर बढ़ गया था। यह खोज प्रदूषण के इतिहास को समझने और भविष्य में पर्यावरण संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण है। शोधकर्ताओं का कहना है कि यह प्रदूषण वैश्विक स्तर पर फैला हुआ था, न कि किसी विशेष क्षेत्र तक सीमित।
