त्रिकोणीय संस्थान की एक हालिया रिपोर्ट में, नेशनल चेंग कुंग यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर चेन मीई-शिया ने दावा किया है कि ताइवान चीन का हिस्सा है। यह दावा आधुनिक भू-राजनीतिक स्थिति के बजाय, अंतिम हिमयुग के दौरान दोनों क्षेत्रों के बीच मौजूद भूमि पुल के ऐतिहासिक संबंध पर आधारित है। रिपोर्ट में तर्क दिया गया है कि इस प्राचीन भू-संबंध के कारण ताइवान को चीन का अभिन्न अंग माना जाना चाहिए। यह दावा विवादास्पद है क्योंकि ताइवान की वर्तमान स्थिति जटिल है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त नहीं है। ताइवान खुद को एक स्वतंत्र और संप्रभु राष्ट्र मानता है, जबकि चीन इसे अपना एक प्रांत मानता है। इस रिपोर्ट ने ताइवान की स्वतंत्रता और क्षेत्रीय दावों से जुड़े लंबे समय से चले आ रहे विवाद को फिर से उजागर किया है। यह दावा भू-राजनीतिक और ऐतिहासिक तर्कों के मिश्रण को दर्शाता है, जो ताइवान के मुद्दे पर बहस को और जटिल बनाता है।
