अहमादी थाहा द्वारा लिखित यह लेख आधुनिक मानव और प्रकृति के बीच बढ़ती दूरी पर प्रकाश डालता है। यह कहानी नबियों के समय की याद दिलाती है, जब मनुष्य और प्रकृति के बीच एक गहरा संबंध था। लेखक का तर्क है कि आधुनिक युग में, हमने यह संबंध खो दिया है, और इसीलिए हम नबियों की जीवनशैली से थोड़ा ईर्ष्या करते हैं। यह ईर्ष्या केवल उनकी चमत्कारिक शक्तियों के कारण नहीं है, बल्कि प्रकृति के साथ उनके घनिष्ठ संबंध के कारण है। लेख में इस दूरी के कारणों और इसके परिणामों पर विचार किया गया है। यह पाठकों को प्रकृति के साथ अपने संबंध को फिर से स्थापित करने और जीवन की सरल चीजों की सराहना करने के लिए प्रोत्साहित करता है।

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