धार्मिक दलों के संयुक्त अल्टीमेटम के बाद, वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक ने पर्दे के पीछे की स्थिति को स्पष्ट किया है। उनका कहना है कि भर्ती कानूनों को पारित करने के बदले में चुनाव की तारीख पर सहमति बनी है। यह समझौता राजनीतिक गतिरोध को तोड़ने का प्रयास है, जो हाल ही में उत्पन्न हुआ था। सूत्रों के अनुसार, धार्मिक दल भर्ती कानूनों में बदलाव चाहते थे, जबकि सरकार चुनाव की तारीख को लेकर चिंतित थी। इस समझौते से दोनों पक्षों को कुछ हद तक राहत मिली है। अब यह देखना होगा कि यह समझौता वास्तव में लागू होता है या नहीं और इसका राजनीतिक परिदृश्य पर क्या प्रभाव पड़ेगा। यह समझौता राजनीतिक दलों के बीच सौदेबाजी और रियायतें देने का परिणाम है।