फ़िनिश वैज्ञानिक ने चेतावनी दी है कि आल्प्स पर्वतमाला के ग्लेशियर सदी के अंत तक पूरी तरह से गायब हो सकते हैं। उनका कहना है कि इस प्रक्रिया को धीमा किया जा सकता है, लेकिन इसे पूरी तरह से पलटना संभव नहीं हो पाएगा। इस वर्ष अकेले, स्विट्जरलैंड के ग्लेशियरों ने अपनी द्रव्यमान का 5% से अधिक खो दिया है। पिघलने की यह गति असाधारण है और नेपाल में हुई त्रासदी जैसी घटनाओं को जन्म दे सकती है। वैज्ञानिक इस स्थिति को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त कर रहे हैं और तत्काल कार्रवाई का आह्वान कर रहे हैं। यह बदलाव न केवल पर्यावरण के लिए, बल्कि जल संसाधनों और पर्यटन पर भी गंभीर प्रभाव डाल सकता है। ग्लेशियरों के पिघलने की दर में वृद्धि जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को स्पष्ट रूप से दर्शाती है।