खुदरा विक्रेताओं का कहना है कि शराब लाइसेंस के लिए नई शुल्क योजना लागू होने से ग्राहकों के लिए शराब महंगी हो जाएगी। उनका मानना है कि इस शुल्क वृद्धि से शराब, बीयर और वाइन बेचने वाले दुकानों की संख्या में भी कमी आ सकती है। खुदरा विक्रेता इस नई नीति को लेकर चिंतित हैं, क्योंकि उनका कहना है कि इससे उपभोक्ताओं पर आर्थिक बोझ पड़ेगा। इस शुल्क वृद्धि का सीधा असर शराब की कीमतों पर पड़ेगा और ग्राहक अधिक पैसे चुकाने के लिए मजबूर होंगे। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि इससे छोटे खुदरा विक्रेताओं को सबसे अधिक नुकसान होगा, क्योंकि वे बढ़े हुए शुल्क को वहन करने में सक्षम नहीं हो सकते हैं। सरकार इस मामले पर विचार कर रही है, लेकिन अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। इस नीति परिवर्तन से शराब बाजार में प्रतिस्पर्धा कम होने की संभावना है।