संयुक्त राष्ट्र विश्वविद्यालय (UNAM) की एक विशेषज्ञ ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के समावेशी होने पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि AI तकनीकें मौजूदा असमानताओं को और बढ़ा सकती हैं, जिससे बहिष्करण का खतरा बढ़ सकता है। विशेषज्ञ के अनुसार, AI उपकरण व्यक्तियों की क्षमताओं को बढ़ाने और समर्थन करने के लिए बनाए गए हैं, लेकिन यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि ये उपकरण सभी के लिए सुलभ हों। AI के विकास में लैंगिक, सामाजिक और आर्थिक विविधताओं को ध्यान में रखना आवश्यक है। अन्यथा, ये तकनीकें कुछ समूहों को पीछे छोड़ सकती हैं। समावेशिता सुनिश्चित करने के लिए AI के डिजाइन और कार्यान्वयन में सावधानी बरतने की आवश्यकता है। यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि AI सभी के लिए समान अवसर प्रदान करे।
