विशेषज्ञों का मानना है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) उपकरणों के व्यापक उपयोग से उच्च प्रशिक्षित पेशेवरों में बुनियादी संज्ञानात्मक क्षमताओं में गिरावट आ रही है। अंतर्राष्ट्रीय वैज्ञानिक समुदाय इस प्रवृत्ति से चिंतित है। AI के बढ़ते इस्तेमाल से लोगों की मौलिक कौशल, जैसे कि समस्या-समाधान और आलोचनात्मक सोच, कमजोर हो सकते हैं। यह दक्षता बढ़ाने के बजाय, दीर्घकाल में मानव क्षमताओं को कम कर सकता है। अध्ययन बताते हैं कि AI पर अत्यधिक निर्भरता से स्वतंत्र रूप से सोचने और निर्णय लेने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। इस स्थिति को लेकर विशेषज्ञों ने चेतावनी जारी की है और AI के उपयोग में सावधानी बरतने की सलाह दी है। भविष्य में, मानव कौशल और AI के बीच संतुलन बनाए रखना महत्वपूर्ण होगा।
