आजकल, शोर और निरर्थक चर्चाओं के बीच, ज्ञानवर्धक संवाद कम हो रहा है। कई विशेषज्ञ अब कृत्रिम बुद्धिमत्ता (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) पर कम बात कर रहे हैं, क्योंकि इस विषय पर बहुत कुछ कहा जा चुका है, लेकिन सार्थक अंतर्दृष्टि कम मिल रही है। यह प्रवृत्ति दर्शाती है कि चर्चा की गुणवत्ता कम हो गई है और सतही बातों पर अधिक ध्यान दिया जा रहा है। विशेषज्ञ अब इस विषय पर अनावश्यक बहस से बचने और अधिक ठोस योगदान देने का प्रयास कर रहे हैं। उनका मानना है कि कम बोलना, अधिक प्रभावी हो सकता है। यह स्थिति कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में गहन चिंतन और वास्तविक प्रगति की आवश्यकता को रेखांकित करती है।