आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के तेजी से बढ़ते विस्तार के लिए बिजली की भारी मांग पैदा हो गई है। इस मांग को पूरा करने के लिए पावर प्लांटों का निर्माण बहुत तेजी से किया जा रहा है। हालांकि, इन परियोजनाओं में सार्वजनिक जांच और पारदर्शिता की भारी कमी देखी गई है। स्थानीय निवासियों को इन संयंत्रों के निर्माण के बारे में पर्याप्त सूचना नहीं दी जा रही है। यह चिंता का विषय है क्योंकि ये प्लांट सीधे तौर पर वायु गुणवत्ता को प्रभावित करते हैं। साथ ही, इनका जलवायु परिवर्तन पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की संभावना है। संक्षेप में, तकनीकी प्रगति की दौड़ में पर्यावरणीय और सामाजिक हितों की अनदेखी की जा रही है।