संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के विकास के कारण 2030 तक डेटा केंद्रों की बिजली खपत दोगुनी हो जाएगी। यह वृद्धि वैश्विक ऊर्जा मांग पर महत्वपूर्ण प्रभाव डालेगी। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि यदि ऊर्जा स्रोतों को टिकाऊ नहीं बनाया गया, तो इससे कार्बन उत्सर्जन में भारी वृद्धि हो सकती है। डेटा केंद्रों को ठंडा रखने के लिए भी भारी मात्रा में पानी की आवश्यकता होती है, जिससे जल संसाधनों पर दबाव बढ़ेगा। संयुक्त राष्ट्र ने ऊर्जा दक्षता में सुधार और नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के उपयोग को बढ़ावा देने का आह्वान किया है। AI के लाभों को बनाए रखने और पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने के लिए तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता है। यह अनुमान AI के बढ़ते उपयोग और डेटा की बढ़ती मांग को दर्शाता है।
