वैश्विक स्तर पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के प्रसार के कारण डेटा केंद्रों की बिजली खपत में भारी वृद्धि होने का अनुमान है। नवीनतम अनुमानों के अनुसार, इस वर्ष बिजली की मांग पिछले वर्ष की तुलना में 26 प्रतिशत से अधिक बढ़ेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह वृद्धि 2030 तक और भी तेज होगी, और मांग दोगुनी से भी अधिक हो सकती है। एआई सेवाओं के संचालन के लिए आवश्यक कंप्यूटिंग शक्ति में वृद्धि के कारण यह मांग बढ़ रही है। डेटा केंद्रों को इस बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए अपनी ऊर्जा दक्षता में सुधार करने और नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों का उपयोग करने की आवश्यकता होगी। यह वृद्धि ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर दबाव डाल सकती है और स्थिरता संबंधी चिंताएं पैदा कर सकती है। इस चुनौती का सामना करने के लिए, उद्योग और सरकार दोनों को मिलकर काम करने की आवश्यकता है।