दार्शनिक और कंप्यूटर वैज्ञानिक गेब्रिएला अर्रियागादा ब्रूनो ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़े नैतिक मुद्दों की पड़ताल की है। उनकी पुस्तक में विश्लेषण किया गया है कि कैसे एल्गोरिदम उन डेटा में मौजूद पूर्वाग्रहों को शामिल करते हैं जिनसे उन्हें प्रशिक्षित किया जाता है। यह डेटा सामाजिक असमानताओं को दर्शाता है, और एल्गोरिदम उन्हें दोहरा सकते हैं। ब्रूनो अधिक पारदर्शी और समावेशी मॉडल प्रस्तावित करती हैं ताकि सामाजिक असमानताओं को बढ़ने से रोका जा सके। उनका शोध एल्गोरिदम के प्रशिक्षण डेटा के चयन के महत्व पर प्रकाश डालता है। यह सवाल उठता है कि एल्गोरिदम क्या सीखते हैं और यह समाज को कैसे प्रभावित करता है। यह पुस्तक कृत्रिम बुद्धिमत्ता के विकास में नैतिकता और जवाबदेही की आवश्यकता पर जोर देती है।