फ्रांस में आयोजित जी7 शिखर सम्मेलन में केन्या के राष्ट्रपति विलियम रुटो ने अफ्रीका के एक नए दृष्टिकोण को रेखांकित किया। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि अफ्रीका अब पुरानी ‘दाता-प्राप्तकर्ता’ मॉडल के साथ आगे नहीं बढ़ना चाहता। महाद्वीप अब सहायता पर निर्भरता से दूर, समान भागीदारी स्थापित करने की दिशा में बढ़ रहा है। रुटो ने अफ्रीका के विकास के लिए पश्चिमी देशों से मिलने वाली सहायता के पारंपरिक स्वरूप पर सवाल उठाए। उनका मानना है कि अफ्रीका को अपनी चुनौतियों का समाधान स्वयं करने और वैश्विक मंच पर समान भागीदार के रूप में उभरने की आवश्यकता है। यह बदलाव अफ्रीका के देशों में आत्मनिर्भरता और आर्थिक स्वतंत्रता की बढ़ती इच्छा को दर्शाता है। इस घोषणा से अफ्रीका और पश्चिमी देशों के बीच संबंधों में एक महत्वपूर्ण बदलाव आने की संभावना है।