जर्मनी द्वारा शरण देने का वादा करने के बावजूद जिन अफ़ग़ानिस्तानियों को वापस भेज दिया गया था, उनका क्या हुआ? हमारी लेखिका ने काबुल में दो परिवारों से मुलाक़ात की। यह कहानी उन लोगों की दुर्दशा को उजागर करती है जिन्हें जर्मनी में सुरक्षा की उम्मीद थी लेकिन उन्हें वापस अफ़ग़ानिस्तान भेज दिया गया। लेखिका ने इन परिवारों के साथ उनकी वापसी के बाद की चुनौतियों और मुश्किलों पर बात की। यह घटना जर्मनी की शरणार्थी नीति और अंतरराष्ट्रीय दायित्वों पर सवाल खड़े करती है। इन परिवारों को उम्मीद थी कि जर्मनी उन्हें सुरक्षा प्रदान करेगा, लेकिन उनकी उम्मीदें टूट गईं। अब वे काबुल में अनिश्चित भविष्य का सामना कर रहे हैं। यह रिपोर्ट इन पीड़ितों की आवाज़ को उठाती है और उनके संघर्षों को दुनिया के सामने लाती है।
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