यूरोपीय संघ के एक समझौते के तहत, डच सेना और सरकारी अभियानों के लिए काम करने वाले अफ़ग़ान दुभाषियों को स्थायी निवास की अनुमति से वंचित कर दिया गया है। ये दुभाषिए अब अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं और उन्हें विशेष श्रेणी में रखने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि उन्होंने डच सेना के लिए जोखिम भरे माहौल में काम किया और उन्हें सुरक्षा प्रदान करना यूरोपीय संघ का नैतिक दायित्व है। डच सरकार इस मामले पर यूरोपीय संघ के साथ चर्चा कर रही है, लेकिन अभी तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है। दुभाषियों का कहना है कि यदि उन्हें सुरक्षा नहीं मिली तो उनकी जान खतरे में पड़ सकती है। इस मुद्दे पर राजनीतिक दलों और मानवाधिकार संगठनों ने भी चिंता व्यक्त की है। वे यूरोपीय संघ से इस मामले में हस्तक्षेप करने और दुभाषियों को सुरक्षा प्रदान करने का आग्रह कर रहे हैं।