हाल के अध्ययनों से पता चलता है कि सबसे सफल समाज वे नहीं हैं जो हर बदलाव का अनुमान लगा पाते हैं, बल्कि वे हैं जो अपनी संस्थाओं को अनुकूलित करने में सक्षम होते हैं। यह विचार 'सामाजिक अनुबंध' के भविष्य पर केंद्रित है। विशेषज्ञ मानते हैं कि भविष्य में सफलता के लिए, समाजों को लचीला और परिवर्तन के प्रति ग्रहणशील होना होगा। कठोर नियमों और अपरिवर्तनीय संरचनाओं वाले समाज पिछड़ सकते हैं। अनुकूलन क्षमता, नवाचार और सीखने की क्षमता ही दीर्घकालिक समृद्धि की कुंजी है। यह दृष्टिकोण सामाजिक और राजनीतिक नीतियों के निर्माण में महत्वपूर्ण बदलाव की आवश्यकता पर जोर देता है। इसका तात्पर्य है कि समाजों को लगातार अपनी संस्थाओं का मूल्यांकन और पुनर्मूल्यांकन करना चाहिए ताकि वे बदलती परिस्थितियों के अनुरूप बने रहें।