थॉमस बर्नहार्ड के नाटक ‘Tout est calme dans les hauteurs’ के मंचन में निकोलस बुशौ ने एक प्रसिद्ध लेखक की मिथ्या छवि को चुनौती दी है। नाटक में, बुशौ एक ऐसे लेखक की भूमिका निभा रहे हैं जो स्वयं को प्रतिभा का धनी मानता है और सम्मानों से घिरा हुआ है। यह प्रस्तुति लेखक के अहंकार और आत्म-प्रशंसा की भावना पर तीखा व्यंग्य करती है। मंचन में लेखक की छवि को खंडित करने का यह प्रयोग दर्शकों को विचारोत्तेजक लग सकता है। आलोचकों ने इस प्रस्तुति को साहसिक और आनंददायक बताया है। यह नाटक लेखक की प्रतिष्ठा और रचनात्मकता के बारे में सवाल उठाता है। कुल मिलाकर, यह प्रस्तुति साहित्यिक जगत में एक महत्वपूर्ण हस्तक्षेप है।