हाल के शोध से पता चलता है कि पिता बच्चों की देखभाल में अधिक सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट डर्बी सैक्सबे के अनुसार, यह भागीदारी न केवल स्वस्थ रिश्तों को बढ़ावा देती है, बल्कि पुरुषों के मस्तिष्क के लिए भी फायदेमंद है। बच्चों की दैनिक देखभाल और पालन-पोषण में शामिल होने से पुरुषों की संज्ञानात्मक क्षमता में सुधार होता है। यह बदलाव उनके समग्र स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक असर डालता है। सैक्सबे का कहना है कि पितृत्व पुरुषों को भावनात्मक रूप से अधिक परिपक्व बनाता है और सामाजिक संबंधों को मजबूत करता है। यह अध्ययन पितृत्व की पारंपरिक भूमिका से परे, पुरुषों के जीवन पर इसके व्यापक प्रभावों को दर्शाता है। इस प्रकार, सक्रिय पितृत्व को पुरुषों के स्वास्थ्य और खुशहाली के लिए महत्वपूर्ण माना जा सकता है।