प्रसिद्ध शिक्षाविद मार्शिया लैंगटन ने एक शाही आयोग को बताया कि ऑस्ट्रेलियाई यहूदियों के प्रति अपने समर्थन के कारण उन्हें नस्लीय दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ा। उन्होंने आयोग को विस्तार से बताया कि उन्हें ऑनलाइन और सार्वजनिक रूप से निशाना बनाया गया था। लैंगटन ने बताया कि यह उत्पीड़न उनके अकादमिक कार्य और सार्वजनिक बयानों के कारण हुआ। इस घटना ने ऑस्ट्रेलिया में यहूदी विरोधी भावना और विद्वानों की स्वतंत्रता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आयोग इस मामले की जांच कर रहा है और नस्लीय भेदभाव से निपटने के उपायों पर विचार कर रहा है। लैंगटन की गवाही यहूदी विरोधी हमलों के शिकार हुए अन्य लोगों के लिए भी एक महत्वपूर्ण संदेश है। यह मामला ऑस्ट्रेलिया में नस्लीय सहिष्णुता और समावेशिता के महत्व को रेखांकित करता है।