नारीवादी दृष्टिकोण से, अबेलार्डो की ‘चमत्कारी राष्ट्र’ योजना में महिलाओं की आर्थिक स्वायत्तता पर सवाल उठाए गए हैं। आलोचकों का तर्क है कि यह योजना महिलाओं की स्वतंत्रता और अधिकारों की गारंटी नहीं देती। यह योजना महिलाओं को केवल ‘माता’ और ‘देखभालकर्ता’ की भूमिका में सीमित करती हुई प्रतीत होती है। ‘ला सील्ला वाकिया’ में प्रकाशित एक विश्लेषण के अनुसार, यह योजना महिलाओं के सशक्तिकरण के बजाय उनकी पारंपरिक भूमिकाओं को मजबूत कर सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि वास्तविक स्वतंत्रता के लिए महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक दोनों तरह से सशक्त बनाने की आवश्यकता है। इस योजना में महिलाओं के लिए ठोस अधिकारों और सुरक्षा उपायों का अभाव है, जो चिंता का विषय है। यह विश्लेषण अबेलार्डो की योजना के लैंगिक समानता पहलुओं पर प्रकाश डालता है।
