85 वर्षीय व्यक्ति ने अपनी संपत्ति का एक हिस्सा स्थायी अभयारण्य में बदलकर एक उल्लेखनीय कार्य किया है। उन्होंने इस क्षेत्र को वन्यजीवों के लिए सुरक्षित आश्रय बनाया है, जहाँ दस हजार से अधिक जंगली जानवरों को वापस प्रकृति में बसाया गया है। यह भूमि पर्यावरणीय अनुसंधान के लिए भी उपयोग की जा रही है, जिससे वन्यजीवों के संरक्षण के प्रयासों को बढ़ावा मिल रहा है। यहाँ वन्यजीवों को छुड़ाने और फिर से जंगल में छोड़ने के कार्यक्रम भी चलाए जाते हैं। इस पहल से न केवल क्षेत्र की जैव विविधता बढ़ी है, बल्कि प्रकृति संरक्षण के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण भी स्थापित हुआ है। यह व्यक्ति प्रकृति के प्रति अपने समर्पण और आने वाली पीढ़ियों के लिए वन्यजीवों को सुरक्षित रखने की अपनी प्रतिबद्धता के लिए प्रशंसा के योग्य हैं। यह निजी अभयारण्य संरक्षण के एक सफल मॉडल के रूप में उभर रहा है।