डॉ. प्रवीणा सुखराज-एली ने लिखा है कि महिलाओं के साहस के 70 वर्ष पूरे होने के बाद, हमारी जिम्मेदारी है कि हम अपने संविधान के वादे को साकार करें। इसका अर्थ है प्रत्येक महिला और लड़की के लिए आर्थिक न्याय, वास्तविक समानता और अवसरों को बढ़ावा देना। यह केवल कानूनी अधिकारों के बारे में नहीं है, बल्कि हर महिला को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और समान अवसर प्रदान करने के बारे में है। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि संविधान में निहित अधिकार सभी महिलाओं के जीवन में महसूस किए जाएं। यह एक सतत प्रक्रिया है जिसमें निरंतर प्रयास और प्रतिबद्धता की आवश्यकता है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने से न केवल महिलाओं का जीवन बेहतर होगा, बल्कि पूरे समाज को लाभ होगा। यह एक समावेशी और न्यायपूर्ण समाज बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।