हाल ही में, ‘गस’ नामक एक टी-रेक्स का जीवाश्म ५०.१ मिलियन डॉलर में बिका, जो अब तक का सबसे महंगा डायनासोर जीवाश्म है। इस रिकॉर्ड बिक्री ने जीवाश्मविदों के बीच चिंता बढ़ा दी है। उनका मुख्य डर यह है कि महत्वपूर्ण वैज्ञानिक मूल्यों वाले जीवाश्म निजी संग्रहकर्ताओं के हाथों में चले जाने से अनुसंधान सीमित हो सकता है। वैज्ञानिक समुदाय का मानना है कि ऐसे जीवाश्म सार्वजनिक संस्थानों में होने चाहिए जहाँ इनका अध्ययन किया जा सके और जनता के लिए उपलब्ध हो। जीवाश्मों की निजी खरीद-बिक्री से इनकी सुरक्षा और संरक्षण भी खतरे में पड़ सकते हैं। इस घटना ने जीवाश्मों के स्वामित्व और पहुंच को लेकर एक महत्वपूर्ण बहस छेड़ दी है।