1973 में, अमेरिका द्वारा इजरायल को अरब-इजरायल युद्ध में सैन्य सहायता प्रदान करने के परिणामस्वरूप ओपेक देशों ने अमेरिका और इजरायल का समर्थन करने वाले अन्य देशों पर तेल की Embargo लगा दी थी। यह Embargo, जिसे अक्टूबर युद्ध के रूप में भी जाना जाता है, वैश्विक ऊर्जा संकट का एक महत्वपूर्ण प्रारंभिक बिंदु था। ओपेक के इस कदम से तेल की आपूर्ति में भारी कमी आई, जिससे विश्व स्तर पर तेल की कीमतों में वृद्धि हुई। इस घटना ने ऊर्जा सुरक्षा और भू-राजनीति के बीच जटिल संबंधों को उजागर किया। यह तेल संकट वैश्विक अर्थव्यवस्था पर एक महत्वपूर्ण प्रभाव डालने वाला साबित हुआ। इसने देशों को ऊर्जा स्रोतों के विविधीकरण और ऊर्जा संरक्षण के महत्व पर विचार करने के लिए मजबूर किया। यह घटनाक्रम आज भी ऊर्जा नीतियों और अंतर्राष्ट्रीय संबंधों को प्रभावित करता है।