न्यूज़रूम के अनुसार, एक विश्लेषण में पाया गया कि 1000 वृद्ध मतदाता 81 वर्षीय राजनेता को सुनने के लिए पहुंचे, जबकि चुनावी आयोग को 18-24 वर्ष के युवाओं को पंजीकृत करने में संघर्ष करना पड़ रहा है। यह स्थिति युवाओं में निराशा पैदा कर रही है, क्योंकि वे महसूस करते हैं कि राजनीतिक प्रणाली वृद्ध लोगों के हाथों में केंद्रित है। इस 'वृद्ध शासन' के कारण युवा पीढ़ी को लगता है कि उनकी आवाज़ अनसुनी कर दी जाती है और उनकी भागीदारी सीमित है। इस असमानता के कारण युवा राजनीतिक प्रक्रिया से दूर हो रहे हैं, जिसके परिणामस्वरूप मतदाता पंजीकरण में कमी आई है। यह स्थिति लोकतंत्र के भविष्य के लिए चिंताजनक है, क्योंकि युवाओं की भागीदारी स्वस्थ राजनीतिक व्यवस्था के लिए आवश्यक है। इस मुद्दे पर ध्यान देने और युवाओं को प्रोत्साहित करने के लिए तत्काल कदम उठाने की आवश्यकता है।

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