यूरोप में एक चिंताजनक स्थिति उत्पन्न हो रही है। यदि उदारवादी विचारधारा का समर्थन कम होता है, तो यूरोप धीरे-धीरे नियंत्रण से बाहर जा सकता है। यह स्थिति देश-दर-देश हो सकती है, जिससे महाद्वीप की स्थिरता खतरे में पड़ सकती है। चरमपंथी दलों का बढ़ता प्रभाव यूरोपीय राजनीति को अस्थिर कर सकता है। इस बदलाव से यूरोपीय एकता और सहयोग पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। यूरोपीय देशों को इस चुनौती का सामना करने के लिए एकजुट होकर काम करना होगा। यह भविष्य में यूरोप की दिशा निर्धारित करने वाला एक महत्वपूर्ण मोड़ है।