निवेशकों की निगाहें फेडरल रिजर्व की बैठक पर टिकी हुई हैं, जहाँ ब्याज दरों में संभावित बदलावों पर चर्चा होगी। कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि के कारण सोने की कीमतों में गिरावट आई है, क्योंकि निवेशकों को मुद्रास्फीति की आशंका है। उच्च ऊर्जा लागत मुद्रास्फीति को और बढ़ा सकती है, जिससे सोने की अपील कम हो सकती है, जो कि मुद्रास्फीति के खिलाफ एक बचाव माना जाता है। बाजार फेडरल रिजर्व के रुख का इंतजार कर रहे हैं ताकि यह पता चल सके कि क्या वे ब्याज दरों में वृद्धि करेंगे। ब्याज दरें बढ़ने से सोने की कीमतों पर और दबाव पड़ सकता है। निवेशक सावधानी बरत रहे हैं और बाजार में अस्थिरता बनी हुई है। फेडरल रिजर्व का निर्णय बाजार के लिए महत्वपूर्ण होगा।

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