सऊदी अरब में साइबर अपराध, आतंकवाद विरोधी कानूनों और इस्लामी कानून की व्याख्या के आधार पर ‘जनता की नैतिकता’ की रक्षा के नाम पर सोशल मीडिया पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। इसके परिणामस्वरूप, सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं को लंबी जेल की सजा मिलने की प्रवृत्ति बढ़ी है, साथ ही मृत्युदंड की संख्या में भी वृद्धि हुई है। इस वर्ष, देश में अब तक कम से कम १७५ लोगों को मृत्युदंड दिया जा चुका है। यह कार्रवाई सोशल मीडिया पर विचारों की अभिव्यक्ति को दबाने की ओर इशारा करती है। आलोचकों का कहना है कि इन कानूनों का इस्तेमाल असंतोष को कुचलने और मानवाधिकारों का हनन करने के लिए किया जा रहा है। सऊदी अरब में मृत्युदंड की दर दुनिया में सबसे अधिक है, जो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर बढ़ते प्रतिबंधों का संकेत है। यह स्थिति अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।