दिपके ने खुलासा किया है कि वह रंका और सौरव के आदेशों का पालन कर रहा था, जिससे यह पता चलता है कि वे आपराधिक न्याय परिषद (CJP) आंदोलन के पीछे के असली मास्टरमाइंड थे। इस खुलासे से मामले की जांच में एक महत्वपूर्ण मोड़ आया है, क्योंकि अब रंका और सौरव पर मुख्य साजिशकर्ताओं के रूप में जांच शुरू हो सकती है। दिपके के बयान से यह भी संकेत मिलता है कि CJP आंदोलन, जो पहले एक सामाजिक न्याय पहल के रूप में प्रस्तुत किया गया था, वास्तव में एक सुनियोजित राजनीतिक साजिश का हिस्सा था। जांच एजेंसियां अब रंका और सौरव के संबंधों और उनके उद्देश्यों की गहराई से जांच कर रही हैं। इस मामले में आगे की जांच से कई चौंकाने वाले खुलासे होने की संभावना है। यह खुलासा CJP आंदोलन की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाता है और इसके समर्थकों में भ्रम पैदा कर सकता है।