दक्षिण अफ्रीका में गेयटन मैकेंज़ी के व्यवहार को रंगभेद-युग के राष्ट्रपति पी. डब्लू. बोथा के “हिस्टीरिया और युद्धमोरकता” के समान बताया गया है। यह बयान प्रेस की स्वतंत्रता पर एक गंभीर हमला है और दक्षिण अफ्रीका के लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए खतरा है। राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा पर मैकेंज़ी को जवाबदेह ठहराने का दबाव बढ़ रहा है। इस मामले ने देश में प्रेस की स्वतंत्रता और राजनीतिक जवाबदेही को लेकर बहस छेड़ दी है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि इस तरह के व्यवहार को चुनौती नहीं दी गई, तो यह मीडिया पर और अधिक हमलों को प्रोत्साहित कर सकता है। मैकेंज़ी के कार्यों से दक्षिण अफ्रीका की लोकतांत्रिक नींव कमजोर हो सकती है। रामफोसा को इस मुद्दे पर तत्काल कार्रवाई करने की आवश्यकता है।