रमछाप में, पारंपरिक लिंगे पिंग झूलों के कारण परिवार फिर से जुड़ रहे हैं और त्योहारों की रस्मों को संरक्षित किया जा रहा है। ये झूलों, जो कभी त्योहारों का अभिन्न अंग थे, अब धीरे-धीरे लुप्त हो रहे थे। लेकिन हाल के वर्षों में, इन झूलों ने सोशल मीडिया पर एक नई पहचान पाई है। लोग इन झूलों की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर साझा कर रहे हैं, जिससे इनकी लोकप्रियता फिर से बढ़ रही है। इससे त्योहारों की पुरानी रस्मों को जीवित रखने में मदद मिल रही है और परिवारों के बीच भावनात्मक बंधन मजबूत हो रहा है। यह देखना सुखद है कि रमछाप की यह परंपरा आधुनिक युग में भी प्रासंगिक बनी हुई है।