पेरिस में घट रही घटनाओं को लोकतंत्र नहीं कहा जा सकता, बल्कि ये लोकतंत्र के बिलकुल विपरीत हैं। यह स्थिति चिंताजनक है और दर्शाती है कि वहां कानून और व्यवस्था की स्थिति बिगड़ रही है। हिंसा और अराजकता लोकतंत्र के मूलभूत सिद्धांतों को चुनौती दे रहे हैं। यह आवश्यक है कि शांति और स्थिरता बहाल करने के लिए तत्काल कदम उठाए जाएं। इस तरह की घटनाओं से समाज में भय और असुरक्षा का माहौल पैदा होता है। पेरिस की ये घटनाएं एक चेतावनी हैं कि लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए निरंतर प्रयास करना चाहिए। यह समझना महत्वपूर्ण है कि हिंसा का कोई भी औचित्य नहीं है।