पाकिस्तान ने अपने घरेलू और विदेशी ऋण पर 490 अरब रुपये का ब्याज भुगतान किया है। यह आंकड़ा देश की वित्तीय स्थिति पर दबाव डाल रहा है। सरकार ने ऋण चुकाने और ब्याज का भुगतान करने के लिए धन जुटाने के लिए विभिन्न उपाय किए हैं, लेकिन यह अभी भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। इस भारी ब्याज भुगतान से देश के विकास परियोजनाओं के लिए धन की उपलब्धता कम हो गई है। विशेषज्ञों का मानना ​​है कि पाकिस्तान को अपने ऋण प्रबंधन नीतियों पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता है। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से ऋण प्राप्त करने के प्रयास भी जारी हैं ताकि वित्तीय स्थिरता हासिल की जा सके। यह स्थिति पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था के लिए चिंताजनक है।