ऑरन हेल्मन ने नेतन्याहू को वोट न देने की घोषणा करने के कुछ घंटे बाद, उन्हें लिकुद चुनाव समिति से 24 घंटे के भीतर जवाब देने का निर्देश मिला है, जिससे निष्कासन की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। हेल्मन ने इस मांग के जवाब में एक तीखा बयान जारी किया है। उन्होंने कहा कि नेतन्याहू उन्हें लिकुद से निकाल सकते हैं, लेकिन वह लिकुद को अपने से नहीं निकाल सकते। यह घटना लिकुद पार्टी के भीतर चल रहे आंतरिक संघर्ष और नेतन्याहू के नेतृत्व पर उठते सवालों को दर्शाती है। हेल्मन का बयान ज़बोतिंस्की, बेगिन और शमीर जैसे लिकुद के ऐतिहासिक नेताओं के नाम लेकर नेतन्याहू पर एक मजबूत नैतिक हमला है। यह मामला इज़राइल की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ हो सकता है, क्योंकि यह पार्टी के भीतर असंतोष और भविष्य की राजनीतिक गठबंधन संभावनाओं को प्रभावित कर सकता है। इस घटना ने लिकुद पार्टी में विभाजन की रेखाओं को और स्पष्ट कर दिया है।