फ़िनलैंड में वापस भेजे गए खोपड़ियों के एक समूह में, “पल्काने खोपड़ियाँ” भी शामिल थीं। इन खोपड़ियों को 1800 के दशक में नस्लीय अध्ययन के लिए स्वीडन ले जाया गया था। हाल ही में किए गए शोध से पता चला है कि स्वीडन से फ़िनलैंड वापस लाई गई सभी खोपड़ियाँ फ़िनिश मूल की नहीं हैं। यह खोज उस समय के नस्लीय सिद्धांतों और अध्ययन के तरीकों पर प्रश्नचिन्ह खड़ा करती है। शोधकर्ताओं का कहना है कि इस खोज से फ़िनलैंड के इतिहास और जनसंख्या के बारे में हमारी समझ को और बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। यह मामला ऐतिहासिक गलतियों को सुधारने और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के महत्व को भी उजागर करता है। आगे की जांच जारी है ताकि खोपड़ियों की सही उत्पत्ति का पता लगाया जा सके।