एएफ़डी (AfD) के राजनेताओं द्वारा दिए गए बयान, जो 1930 के दशक के लगते हैं, चौंकाने वाले और मूर्खतापूर्ण हैं। यह सवाल उठता है कि वे ऐसा क्यों कर रहे हैं। ऐसे बयान न केवल आपत्तिजनक हैं बल्कि राजनीतिक रूप से भी हानिकारक हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह चरमपंथी विचारधारा और ऐतिहासिक संदर्भ की समझ की कमी का परिणाम हो सकता है। यह प्रवृत्ति जर्मनी में लोकतंत्र और सामाजिक सहिष्णुता के लिए खतरा है। इस तरह के बयानों की कड़ी निंदा की जानी चाहिए और इनसे निपटने के लिए तत्काल कदम उठाने चाहिए। यह महत्वपूर्ण है कि राजनेता जिम्मेदारी से बोलें और इतिहास के प्रति सम्मान दिखाएं।