दुर्गापूजा का यह सप्ताह है। दुर्गापूजा आते ही बचपन की कितनी यादें ताज़ा हो जाती हैं। परिचित पूजा मंडप, बच्चों के साथ देवी दुर्गा की प्रतिमाएं, ढोल की धुन, शंख की ध्वनि, धूप और फूलों की खुशबू, एक मंडप से दूसरे मंडप में लोगों का आना-जाना – ये सब याद आते हैं। दुर्गापूजा सिर्फ एक त्योहार नहीं है, बल्कि यह पीढ़ियों को जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक बंधन भी है। यह त्योहार नई पीढ़ी में आशा और उत्साह का संचार करता है। यह उत्सव हमें अपनी जड़ों से जोड़े रखता है और भविष्य की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित करता है। दुर्गापूजा में निहित भावनाएं हमें एकजुट करती हैं और समाज में सद्भाव को बढ़ावा देती हैं।