दक्षिण अफ़्रीका में आगामी 4 नवंबर के स्थानीय चुनावों से पहले, आप्रवासन विरोधी आंदोलन ने ऑनलाइन राजनीतिक चर्चा में फिर से प्रमुखता हासिल कर ली है। सरकार की शरणार्थी नीति में बदलाव और कार्यकर्ता जैसिंटा न्गोबेस-ज़ुमा से जुड़े विवादों ने इस आंदोलन को बढ़ावा दिया है। संवैधानिक न्यायालय का एएनसी उम्मीदवारों को बहाल करने का निर्णय राजनीतिक संघर्षों को और बढ़ा रहा है। इसके साथ ही, संदेह है कि गुप्त भुगतान वाले अभियान अब केवल सरकारी संस्थाओं पर ही नहीं, बल्कि व्यक्तिगत राजनेताओं को भी निशाना बना रहे हैं। यह स्थिति दक्षिण अफ़्रीका की चुनावी प्रक्रिया में जटिलता ला रही है। यह आंदोलन दक्षिण अफ़्रीका की चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित कर रहा है। इन सभी कारकों से चुनाव का एजेंडा निर्धारित हो रहा है।

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